Saturday, June 3, 2017

माथा अपना फोड़ रहे हैं

इक दूजे को जोड़ रहे हैं
कुछ को लेकिन छोड़ रहे हैं

लाख बुझाने पर ना समझे
फिर उनसे मुँह मोड़ रहे हैं

जीवन में जो प्रेम सुधा रस
निशि दिन उसे निचोड़ रहे हैं

कदर नहीं रिश्तों की जिनको
रिश्ता, उनसे तोड़ रहे हैं

जो चूके, फिर वही सुमन से
माथा अपना फोड़ रहे हैं

Friday, May 19, 2017

जिन्दगी मझधार में

झूठ शामिल कर सका ना आजतक किरदार में
प्यार महसूसा जहाँ, धोखा मिला उस प्यार में

आँख मिलते, मुस्कुराने का चलन बढ़ता गया
कौन अपना,  खोज पाना, है कठिन संसार में

औरतों के जिस्म का व्यापार सदियों से हुआ
जिस्म बिकते मर्द के भी आजकल बाजार में

क्या विरासत छोड़ना है कल की खातिर सोचना
हर कदम इन्सानियत भी घट रही रफ्तार में

साथ सबके जी सकें हम है असल में जिन्दगी
छोड़कर जाते सुमन क्यों जिन्दगी मझधार में

Saturday, May 13, 2017

रहेगी बात अधूरी

अगर हो पल पल का सम्मान,
तो बनता जीवन इक वरदान।
करो फिर चाहे लाख बखान,
रहेगी बात अधूरी। कभी होगी ना पूरी।।

मिले रस्ते में शायद फूल,
जहाँ अक्सर मिलते हैं धूल।
सदा मौसम किसका अनुकूल,
मगर संघर्ष करे इन्सान।
रहेगी बात अधूरी। कभी होगी ना पूरी।।

कहीं पर चाँद, कहीं पर रवि,
बनो श्रोता, कहीं पर कवि।
तुम्हारी वैसी होगी छवि,
तुम्हारा कर्म, तेरी पहचान।
रहेगी बात अधूरी। कभी होगी ना पूरी।।

कभी खुशियाँ, कभी उलझन,
है कारण क्या, करो मंथन।
तभी सम्भव है मिले सुमन,
लुटाए खुशबू और मुस्कान।
रहेगी बात अधूरी। कभी होगी ना पूरी।।

कविता ही भगवान मुसाफिर

सबके प्रश्न समान मुसाफिर
क्या होते भगवान मुसाफिर
बिनु अनुभव के बाँट रहे सब
इक दूजे को ज्ञान मुसाफिर

जब संकट में जान मुसाफिर
लुप्त वहाँ सब ज्ञान मुसाफिर
जाने अनजाने सब कहते
बचा मुझे भगवान मुसाफिर

रखो सभी का ध्यान मुसाफिर
करना सबका मान मुसाफिर
कौन जानता बुरे वक्त में
कौन बने भगवान मुसाफिर

कहीं इबादत, ध्यान मुसाफिर
जीवों का बलिदान मुसाफिर
पर भूखों को दिखताहरदम    
रोटी में भगवान मुसाफिर

प्रायः सब अनजान मुसाफिर
कहाँ छुपा भगवान मुसाफिर
खुद को दूत कहे भगवन से
गहरी है पहचान मुसाफिर

जहाँ विवश विज्ञान मुसाफिर  
तब टूटे अभिमान मुसाफिर
उसी विवशता में खोजो तो
खड़ा मिले भगवान मुसाफिर

कुछ को धन का मान मुसाफिर
कई अरजते ज्ञान मुसाफिर
अन्तर्मन से सुमन सोचता
कविता ही भगवान मुसाफिर 

Sunday, April 30, 2017

कर Delet, Photo सदा

नई नई तकनीक से, बढ़े देश का मान।
बाँट रहे सब मुफ्त में, WhatsApp पर ज्ञान।।

पढ़कर भी संदेश को, मिला न कोई Taste।
सभी भेजने में लगे, करके Copy, Paste।।

WhatsApp खोला जहाँ, Photo की भरमार।
व्यर्थ कई शुभकामना, पढ़ने को लाचार।।

डरते, Mobile कहीं, हो जाए ना जाम।
कर Delet, Photo सदा, Regular तेरा काम।।

WhatsApp के Group में, देखा रोज विवाद।
ज्ञानीजन जोड़ो नहीं, सुमन हृदय अवसाद।।

हिन्दी प्रेमियों से मुआफी की अपील के साथ
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विश्व की महान कलाकृतियाँ- पुन: पधारें। नमस्कार!!!